Eklingji :मेवाड़ के राजा: एकलिंगजी

Eklingji मेवाड़ के राजा एकलिंगजी

Eklingji: मेवाड़ के राजा: एकलिंगजी

मेवाड़ के राजा कौन हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो अक्सर लोगों के मन में आता है। हालांकि, इसका कोई सीधा जवाब नहीं है। मेवाड़ के लोगों के लिए, एकलिंगजी ही उनके राजा हैं। एकलिंगजी, भगवान शिव के एक रूप हैं, जो मेवाड़ के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक नेता हैं।

  • मेवाड़, राजस्थान का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है।
  • मेवाड़ पर कई शक्तिशाली शासकों ने शासन किया है, जिनमें महाराणा प्रताप सिंह, महाराणा सांगा और महाराणा कुम्भा जैसे महान योद्धा शामिल हैं।
  • वर्तमान में, मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप सिंह के वंशज हैं।
  • मेवाड़ के लोगों के लिए, एकलिंगजी ही उनके राजा हैं।
  • एकलिंगजी, भगवान शिव के एक रूप हैं, जो मेवाड़ के रक्षक माने जाते हैं।
  • एकलिंगजी का मंदिर मेवाड़ की राजधानी उदयपुर में स्थित है।
  • एकलिंगजी का मंदिर मेवाड़ के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

मेवाड़ के इतिहास और शासकों का परिचय।

मेवाड़, राजस्थान का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। इस क्षेत्र पर कई शक्तिशाली शासकों ने शासन किया है, जिनमें महाराणा प्रताप सिंह, महाराणा सांगा और महाराणा कुम्भा जैसे महान योद्धा शामिल हैं। वर्तमान में, मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप सिंह के वंशज हैं।

हालांकि, मेवाड़ के लोगों के लिए, Eklingji ही उनके राजा हैं। Eklingji, भगवान शिव के एक रूप हैं, जो मेवाड़ के रक्षक माने जाते हैं। Eklingji का मंदिर मेवाड़ की राजधानी उदयपुर में स्थित है। यह मंदिर मेवाड़ के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।


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मेवाड़ के लोगों के लिए Eklingji की महत्ता का वर्णन

Eklingji का इतिहास लंबा और समृद्ध है। कहा जाता है कि Eklingji की मूर्ति को 8वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक बाप्पा रावल ने स्थापित किया था। बाप्पा रावल, मेवाड़ के पहले शासक थे, और उन्होंने मेवाड़ की स्थापना की थी। बाप्पा रावल ने एकलिंगजी को मेवाड़ का राजा घोषित किया, और उन्होंने मंदिर के निर्माण की शुरुआत की।

Eklingji का मंदिर कई बार नष्ट और फिर से बनाया गया है। 13वीं शताब्दी में, दिल्ली सल्तनत के शासकों ने मंदिर को नष्ट कर दिया। बाद में, मेवाड़ के शासकों ने मंदिर को फिर से बनाया। 15वीं शताब्दी में, महाराणा कुम्भा ने मंदिर का विस्तार और जीर्णोद्धार किया।

Eklingji मंदिर, मेवाड़ की वास्तुकला और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। मंदिर की वास्तुकला राजपूत वास्तुकला शैली की है, और इसमें कई सुंदर नक्काशीदार स्तंभ और मूर्तियां हैं। मंदिर का गर्भगृह, Eklingji की चारमुखी मूर्ति के लिए समर्पित है। मूर्ति चार दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती है: पूर्व में विष्णु, पश्चिम में ब्रह्मा, उत्तर में शिव और दक्षिण में रुद्र।

मेवाड़ के लोग Eklingji को अपने राजा के रूप में मानते हैं क्योंकि वे उन्हें एक शक्तिशाली और दयालु देवता मानते हैं। वे मानते हैं कि एकलिंगजी मेवाड़ की रक्षा करते हैं और उन्हें खुशहाली और समृद्धि प्रदान करते हैं। एकलिंगजी को मेवाड़ की समृद्धि और स्थिरता के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

निष्कर्ष

Eklingji, मेवाड़ के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक नेता हैं। वे मेवाड़ के इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं।

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