Green Hydrogen भारत EU और सिंगापुर को ग्रीन हाइड्रोजन आपूर्ति करने के लिए चर्चा में है

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Green Hydrogen भारत EU और सिंगापुर को ग्रीन हाइड्रोजन आपूर्ति करने के लिए चर्चा में है

ग्रीन हाइड्रोजन के बारे में जानिए उत्पादन तकनीकें और भारत सरकार की पहलें। साथ ही, यह पूरी जगह में कैसे उपयोग किया जा सकता है।

शुरू करने से पहले, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम ग्रीन हाइड्रोजन के बारे में थोड़ी बेसिक जानकारी प्राप्त करें। ग्रीन हाइड्रोजन, जो क्लीन एनर्जी स्रोत के रूप में मान्यता प्राप्त कर रहा है, हाइड्रोजन गैस का एक रूप है जो कि पूर्णतः शून्य उत्सर्जित करता है। इसका अर्थ है कि हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग के दौरान कोई विषाणु ध्वस्त या कार्बन पाउडर नहीं उत्पन्न होता है, जो कि पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा है।

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ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन – के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि जलीय विद्युत विभाजन, जहां पानी को विद्युत के माध्यम से विभाजित करके हाइड्रोजन और ऑक्सीजन प्राप्त किया जाता है। दूसरे प्रकार के प्रोसेस में, ग्रीन हाइड्रोजन को सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और ज्वालामुखी ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है। इन सभी तकनीकों का उद्घाटन और विकास ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के मेहनती प्रयासों का परिणाम है।

ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जैसे कि वाहनों की चालकता, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन, और भविष्य की सम्भावित सुरक्षित और स्वर्णिम ऊर्जा संरचना। ग्रीन हाइड्रोजन वाहनों के मामले में, हाइड्रोजन पाइलॉटिंग कार, हाइड्रोजन सेल ऑटोमोबाइल, और हाइड्रोजन ई-रिक्शा जैसी विकल्पिक गाड़ियों का उद्घाटन किया गया है। इन गाड़ियों में हाइड्रोजन पाइलॉटिंग कर्सिट (HFCV) एक मुख्यतः इलेक्ट्रिक मोटर के साथ मिलकर काम करता है, जो हाइड्रोजन के साथ विद्युत उत्पादित करता है।

ग्रीन हाइड्रोजन के लाभों के अलावा, इसके प्रोडक्शन में उपयोग होने वाले स्रोतों का भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है। सोलर पावर, पवन ऊर्जा, जलीय ऊर्जा, और ज्वालामुखी ऊर्जा जैसे स्रोतों का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है। इससे न केवल स्थायी और स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होता है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक सुरक्षित और निरंतर संचालन के साथ भी प्राकृतिक संसाधनों की संरक्षण और उपयोग भी करता है।
आपने दूसरे हिस्से में प्रदान की गई जानकारी के आधार पर, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग के लिए भारत सरकार ने कई पहल की हैं। इसके लिए नई और नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, और भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) की सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन को संगठित किया गया है। इन संगठनों ने संयुक्त रूप से एक पूरी कॉन्फ्रेंस आयोजित की है, जिसका मुख्य उद्देश्य था सुनिश्चित करना कि ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर को सतत पारिस्थितिकीय प्रणाली के रूप में देखा जाए।

भारत में हरित हाइड्रोजन का भविष्य

इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) को मंजूरी दी थी। इस मिशन का मकसद है कि 2030 तक भारत में अधिक से अधिक हाइड्रोजन उत्पादन किया जाए, ताकि हम विदेश से ज्यादा हाइड्रोजन आयात न करने के लिए स्वतंत्र हो सकें। इसके लिए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि इस मिशन के लिए 19,700 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को पर्यावरणीय संकल्पना में लाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे हम अपनी हाइड्रोजन की आवश्यकता को आपूर्ति के माध्यम से पूरा कर सकेंगे।

सरकार इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में निवेश करने के लिए कई योजनाएं बना रही है। उदाहरण के लिए, अगले पांच वर्षों में, यदि कोई उद्योग ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित करता है, तो सरकार उसे सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन प्रदान करेगी। इसके अलावा, इसके अंमुखीकरण और नियोजन का कार्य नवीनीकृत और नई और नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय द्वारा किया जाएगा, जिसके मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर देखा जाएगा। सरकार के प्रोत्साहन कार्यक्रम के अंतर्गत, यदि कोई उद्यमी अगले पांच वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट लगाता है, तो वित्त मंत्रालय के द्वारा तैयार किए जाने वाले निर्देशों के अनुसार उसे आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

इस प्रकार, भारत सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इससे देश में स्वतंत्र और सुरक्षित ऊर्जा का निर्माण होगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। ग्रीन हाइड्रोजन तकनीकी में नवीनतम विकासों के माध्यम से, भारत दुनिया में आगे बढ़ सकता है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा संचालित क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा।

इस प्रकार, भारतीय सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को देश की ऊर्जा मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, संगठनों और उद्योग संघों के सहयोग के साथ ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और प्रचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार ने विभिन्न योजनाएं और नीतियां बनाई हैं जो ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करेंगी और समर्थन करेंगी। इससे देश में ग्रीन हाइड्रोजन की विकास और उपयोग की गति में तेजी आएगी और हम एक स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा संचालित भारत की ओर अग्रसर होंगे।
तीसरे हिस्से के आधार पर, भारत सरकार द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल शुरू की गई हैं। इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन को सफलतापूर्वक इंडस्ट्रीज़ में लागू करने के लिए सरकार द्वारा कई उद्योगों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।

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भारत सरकार द्वारा यह मिशन संचालित करने के लिए अधिकांश निवेश प्राइवेट सेक्टर से किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में निवेश करने के लिए विभिन्न आर्थिक प्रोत्साहन योजनाएं बनाई हैं। यहां तक कि सरकार ने प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत एक आठ लाख करोड़ रुपये का निवेश की घोषणा की है, जो ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में सरकारी और निजी क्षेत्र से आए निवेशों को उद्यमों को संभव बनाने के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा, सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वित्तीय संस्थाओं को भी ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

सरकार द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अन्य महत्वपूर्ण उपायों में से एक हैं प्रोत्साहन और नीति मार्गदर्शन। सरकार द्वारा गठित नवीनीकृत और नई और नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर, संबंधित उद्योगों को संपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के तहत, अगले पांच वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं की शुरुआत करने वाले उद्यमियों को वित्तीय सहायता, टैक्स छूट, सब्सिडी, और अन्य प्रोत्साहन प्रदान की जाएगी।

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इस प्रकार, भारत सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकारी और निजी क्षेत्र संगठनों के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर को और विकसित किया जा रहा है, जिससे देश में नई और स्वतंत्र ऊर्जा संसाधनों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का पूर्णतः संगठित तरीके से पालन होगा। इसके साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी विकास द्वारा भारत वैश्विक मंच पर उभर सकता है, और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नए ऊर्जा संचालित क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

भारत में हरित हाइड्रोजन पहल

इस प्रकार, भारतीय सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को देश की ऊर्जा मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए सरकार ने विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, संगठनों और उद्योग संघों के सहयोग के साथ ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और प्रचार को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही, सरकार ने विभिन्न योजनाएं और नीतियां बनाई हैं जो ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करेंगी और समर्थन करेंगी। इससे देश में ग्रीन हाइड्रोजन की विकास और उपयोग की गति में तेजी आएगी और हम एक स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा संचालित भारत की ओर अग्रसर होंगे।

इस अद्यावधिक लेख में हमने भारत सरकार द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन के प्रयोग और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रमुख पहलों का विस्तार किया है। यह प्रयास देश में नए और स्वतंत्र ऊर्जा संसाधनों के विकास को संभव बनाएगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आर्थिक विकास को बढ़ावा प्रदान करेगा। इसके साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी विकास द्वारा भारत दुनिया में अग्रणी राष्ट्र बन सकता है। ग्रीन हाइड्रोजन के प्रयोग से भारतीय अर्थव्यवस्था को नए और स्थायी ऊर्जा संचालित क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिससे हमारी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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