राजस्थान पत्रिका ने mewar के राजा एकलिंग नाथ का किया अपमान

राजस्थान पत्रिका ने mewar के मेवाड़ के राजा एकलिंग नाथ का किया अपमान

राजस्थान पत्रिका ने mewar के मेवाड़ के राजा एकलिंग नाथ का किया अपमान

परिचय:

राजस्थान पत्रिका ने mewar के मेवाड़ के राजा एकलिंग नाथ का किया अपमान : राजस्थान पत्रिका एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र है जिसने पत्रकारिता के क्षेत्र में कई बार नई ऊंचाइयों को छुआ है। हालाँकि, हाल के वर्षों में, पत्रिका ने अपने मूल्यों से दूर जाने के संकेत दिखाए हैं।

27 अगस्त, 2023 को, राजस्थान पत्रिका ने दिवाना शाह दरगाह के उर्स से संबंधित एक समाचार प्रकाशित किया। समाचार के शीर्षक में कहा गया था कि “मेवाड़ के राजा का उर्स कुल की फातिहा के साथ संपन्न हुआ।”

यह शीर्षक मेवाड़ के इतिहास और संस्कृति का अपमान है। मेवाड़ ने सदियों से अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी है। मेवाड़ के राजाओं ने खुद को एकलिंग नाथ का दीवान कहा था, जो मेवाड़ के प्रमुख देवता हैं।

राजस्थान पत्रिका का शीर्षक यह दर्शाता है कि पत्रिका मेवाड़ के इतिहास और संस्कृति के बारे में अनभिज्ञ है। यह पत्रिका के पाठकों के साथ-साथ मेवाड़ के लोगों के साथ भी अपमानजनक है।

https://youtube.com/shorts/mL8j8VblHHU?si=xUVRQ0mDX7L07vBp

यह शीर्षक निम्नलिखित तरीकों से मेवाड़ के इतिहास और संस्कृति का अपमान करता है:

  • यह यह दर्शाता है कि राजस्थान पत्रिका को यह नहीं पता है कि मेवाड़ के राजाओं ने खुद को एकलिंग नाथ का दीवान कहा था।
  • यह यह दर्शाता है कि राजस्थान पत्रिका को यह नहीं पता है कि मेवाड़ के लोग अपने धर्म और संस्कृति के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखते हैं।

निष्कर्ष:

राजस्थान पत्रिका को तुरंत अपने शीर्षक को वापस लेना चाहिए और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। पत्रिका को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी गलतियाँ न हों।

अतिरिक्त जानकारी:

राजस्थान पत्रिका की यह गलती मेवाड़ के लोगों के लिए बहुत ही आहत करने वाली है। मेवाड़ के लोग अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। राजस्थान पत्रिका की यह गलती यह दर्शाती है कि पत्रिका मेवाड़ के लोगों की भावनाओं की परवाह नहीं करती है।

राजस्थान पत्रिका को अपनी इस गलती के लिए मेवाड़ के लोगों से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें यह आश्वासन देना चाहिए कि भविष्य में ऐसी गलतियाँ नहीं होंगी। पत्रिका को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके संपादक और पत्रकार मेवाड़ के इतिहास और संस्कृति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें ताकि ऐसी गलतियाँ दोबारा न हों।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *